Saturday, March 31, 2012

राजा भोज का मक्का में मक्केश्वर पूजन "

<<<<<<" राजा भोज का मक्का में मक्केश्वर  पूजन ">>>>>
२०६९ वर्ष से पहले राजा भोज ने मक्का में जाकर वहां स्थित प्रसिद्ध शिव लिंग मक्केशावर का पूजन किया था ,इसका वर्णन भविष्य-पुराण में निम्न प्रकार है :-
                                                "नृपश्चैवमहादेवं  मरुस्थल  निवासिनं !
                                                गंगाजलैश्च संस्नाप्य पंचगव्य समन्विते : 
                                                 चंद्नादीभीराम्भ्यचर्य तुष्टाव  मनसा हरम !
                                                  इतिश्रुत्वा  स्वयं देव: शब्दमाह नृपाय  तं!
                                               गन्तव्यम  भोज राजेन महाकालेश्वर स्थले !! "
                                                                                                                       (सत्य ...शर्मा )

Thursday, March 29, 2012

वेदव्यास जी का ईरान भ्रमण ">

"<<<<<<< वेदव्यास जी का ईरान भ्रमण ">>>>>>>>>>
अठ्ठारह पुराणों के रचियता महर्षि वेदव्यास जी  इरान में वहां के विद्वानों को शास्त्रार्थ में हराकर आये थे !
उस समय वहां पर गश्ताशप नाम का राजा राज्य करता था  . व्यास जी ने इरानी प्रतिवादी को शास्त्रार्थ में पराजित किया था जिस पर उनको वहाँ पर बहुत सम्मान प्राप्त हुआ एवं प्रतिष्ठा प्राप्त हुई ! इस विषय में पारसियों के धर्मग्रन्थ  ' शातीर '  में उल्लिखित है  :- 
              

                               "अकनु बिरमने व्यास्नाम अज हिंद आयद  !                                दाना कि  अल्क    चुना  नेरस्त  !!

अर्थात  :- "व्यास नाम का एक ब्राह्मन हिन्दुस्तान से आया . वह बड़ा ही  चतुर  था और उसके सामान अन्य कोई बुद्धिमान नहीं हो सकता  ! "
(सत्य ..शर्मा )

Wednesday, March 28, 2012

अद्भुत योगी

"पोटेशियम साइनाइड ( KCN ) खाकर भी जीवित रहने वाले भारतीय योगी "
पोटेशियम साइनाइड अत्यंत तीक्षण महाविष  है जो एक पल से भी कम समय में किसी भी प्राणी की जीवन लीला को समाप्त कर सकता है.विज्ञान द्वारा स्थापित इस सत्य को भारत के एक योगी ने असत्य प्रमाणित कर दिया !
      १६ जनवरी  सन १९३२ में विश्व के महानतम वैज्ञानिकों  सर सी० वि० रमण की अध्यक्षता में कलकत्ता विश्वविद्यालय में इस विलक्षण और अविश्वसनीय  प्रदर्शन का आयोजन हुआ !
      कलकाता विश्वविद्यालय के विज्ञान विभाग के रीडर डा० नियोगी ;इसी विश्वविद्यालय के फेकल्टी ऑफ़ साइंसके डीन डॉ० भट्टाचार्य ;रसायन शास्त्र विभाग के हेड ऑफ़ द डिपार्टमेंट डॉ० सरकार आयोजन कमेटी में थे !
     इसकी सूक्षम जांच समिति में पञ्च सदस्य थे :- १ ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय इंग्लेंड के विज्ञान विभाग के अध्यक्ष ;२ पेरिस विश्वविद्यालय फ़्रांस साइंस फेकल्टी के डीन ; ३ न्यूयार्क विश्वविद्यालय अमेरिका के विज्ञानं रीडर ;४ मद्रास विश्ववद्यालय के एक प्रोफ़ेसर  तथा ०५ डॉ०नियोगि कलकत्ता विश्वविद्यालय  !
सम्पूर्ण दस्तावेजी प्रिक्रिया पूरी करने तथा योगी  नरसिंह स्वामी का पूर्ण परीक्षण के बाद पाहिले योगी के हाथ पर तेज तेजाब रखा गया उओगी उसे शहद की भांती चाट गए .पश्चात संखिया .कुचला आदि विष भी जब उन्होंने खा लिए .
अंतत सर्वसम्मती से योगी नरसिंह स्वामी को संसार का तीक्षणतम विष पोटेशियम साइनाइड ( KCN ) दिया
जय माँकाली का उद्घोष कर योगी ने उस तीक्षण विष को निष्क्रिय पदर्थ की भांति खा लिया और कड़े मुस्कुराते रहे .सम्पूर्ण सभागार में सुचिभेद सन्नाटा छा गया ,कुछ मिनटों के बाद तालियों की गडगडाहट ने उस सन्नाटे को भंग किया .सभी उनके चरण स्पर्श करने को होड़ लगाने लगे  और चरण स्पर्श कर अपनी श्रधा व्यक्त करने लगे !
(सत्य..शर्मा )

Tuesday, March 27, 2012

यादों का वो कारवां

>>>>>>>>>> "माँ "<<<<<<<<<
दूध के गिलास  में प्यार को यूँ घोलना
       बंद मुठ्ठियों को मेरी यूँ धीरे धीरे खोलना !
                   रूठना ,दुलारना ,और फिर वो मनाना
                                 याद आता है मुझे माँ यादों का वो कारवां !!

"पदार्थ का परमाणु विज्ञान - भारत की देन है "

               <<<<<<<,"पदार्थ का परमाणु विज्ञान  - भारत की देन है ">>>>>>>.
६०० सदी ईसापूर्व भारत  के दार्शनिक ऋषि विज्ञानिक "कणाद " ने अपने वैशेषिक सूत्र का प्रतिपादन किया था .
इस वैशेषिक दर्शन का सार है - "पदार्थ का परमाणु सिद्धांत".कणाद ऋषि को उनकी परमाणु आविष्कार के लिए जाना जाता है 
        उन्होंने ही पदार्थ अविभाजित होने वाले सुक्षम्तम कण को परमाणु नाम दिया था .इस सिद्धांत के अनुसार समस्त वस्तुए परमाणु से बनी हैं .और कोई भी पदार्थ का जब विभाजन होना समाप्त हो जाता है तो उस अंतिम अविभाज्य कण को ही परमाणु कहतें हैं .यह ना तो मुक्त स्थिति में रहता है और ना ही इसे मानवीय नेत्रों से अनुभव किया जा सकता है .यह शाश्वत और नस्त ना किये जाने वाला तत्व है .
       कणाद के अनुसार जितने प्रकार के पदार्थ होते हैं उतने ही प्रकार के परमाणु होते हैं ,प्रत्येक पदार्थ की अपनी ही प्रवृति और गुण  होतें  है .जो उस परमाणु के वर्ग में आने वाले पदार्थ के समानहोती है ,इसलिए इसे वैशेषिक सूत्र सिद्धांत कहते हैं !
        कणाद के एटमिक थ्योरी को तात्कालिक यूनानी दार्शनिकों से कहीं अधिक उन्नत और प्रमाणिक थी !
 (सत्य ...शर्मा )

<"कितना गहरा है सागर ?">

<<<<<<<<<"कितना गहरा है सागर ?">>>>>>>>
सम्पूर्ण विश्व का कुल ७१% भाग समुद्र में समाया हुआ है .इसका क्षेत्रफल ३६१ मिलियन वर्ग कि०मि०  है .
इसकी औसत गहराई लगभग ३७३० मीटर है  और कुल आयतन १३४७०००मिलियन घन कि ० मी० है .
महासागर का सबसे गहरा भाग प्रशांत महासागर का मरीना ट्रेंच है ,जिसकी गहराई ११,५१६ मी० है .
जबकि पृथ्वी का सबसे ऊँचा भाग " माउन्ट एवरेस्ट " है 

Monday, March 26, 2012

ॐ जय जगदीश हरे

"ॐ जय जगदीश हरे " यह आरती भारतीय हिन्दुओं के तन मन और आत्मा तक को आनंद से परिपूर्ण कर एक अद्भुत शान्ति प्रदान करती है .कारुणिक आत्मिक एवं आध्यात्मिक विचारों से परिपूर्ण इस आरती को सर्वप्रथम किस व्यक्ति ने लिखा था ? कहाँ लिखा था? तथा किस भाषा में लिखा था ? जाने :- 
       सन १८६० में पंजाब प्रान्त के फिल्लोर नामक स्थान के एक विद्वान "पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी "ने घर घर में गाईजाने वाली इस आरती को सर्वप्रथम अरबी - फारसी लिपि में लिखा था .कारण की उस काल में पंजाब में यही लिपि मान्य थी . भारत के अबतक के इतिहास में सर्वाधिक लोकप्रिय आरती यही है .