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Wednesday, March 21, 2012

शारीरिक सौदर्य

पार्थिव सौन्दर्य जिसे हम शारीरिक सौदर्य भी कहते हैं वास्तव में नीच गति की और ले जाता है ,जिसके कारण हम सौन्दर्य और अपना दोनों को ही नष्ट कर लेते हैं .उद्धरण के लिए एक सुरभित  सुन्दर पुष्प हमें अपनी और आकृष्ट करता है ,तुरंत ही हमारे मन में उसे प्राप्त करने की अभिलाषा उत्पन्न होती है,हम निष्ठुरता से उसे डाल से तोड़ कर अपने नेत्रों और नासिका को क्षणिक आनंद प्रदान करतें हैं .थोड़ी देर के बाद वह पुष्प अपना सौंदर्य और सुरभि खो देता है ,तब हम उसको धुल में फेंक कर, पेरों से रोंदते हुए चल पडतें हैं .
 " भौतिक सौन्दर्य की यही परिणिति है "

Monday, March 19, 2012

<"सच्ची सुन्दरता ">

<<<<<<<<<<"सच्ची सुन्दरता ">>>>>>>>>>>
सच्ची सुन्दरता वह है जिसके संपर्क से दूसरों में भी सुन्दरता आ जाए !
स्वयं की सुन्दरता केवल एक व्यक्ति तक ही सिमित है ,
जिसके सम्पर्क में आकर असुन्दर भी सुन्दर हो जाये  
वही सच्ची सुन्दरता है !!
<<<<<<<<<<"True Beauty">>>>>>>>>  'so
Tru beauty is that whose compeny makes other beautiful !
Self beauty is omly up to oneself ,
Whose compney changes ugly into beautiful
Is called 'The True Beauty'!!
(satya ...sharma)