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Friday, May 4, 2012

>>>>>>>" Don't Blame ! "<<<<<<<
why blame anyone in our life............!
..............When...........
Good people give us happiness........!!
Bad ones give an experience............!!!
Worse ones give a lesson.................!!!!
...............And.....................
Best ones give us memories..............!!!!!
 (Satya...Sharma )

Wednesday, May 2, 2012

valuable

>>>>>>>> "Relationship is more valuable "<<<<<<<
"Compromising does not mean........
 That you are wrong and some one is right......,
It only means that you value your relationship........
More than your ego...............................................................................!!!!
(Satya .. sharma )

Sunday, April 1, 2012

शिष्टाचार

<<<<"हिन्दू संस्कृति में शिष्टाचार के नियम ">>>>

१ .भारतीय संस्कृति में बच्चों के नाम सुन्दर और  प्यारे रखने की परम्परा है ,ताकि जब हुम उनके नाम पुकारे  तो हमारे ह्रदय में उठाने वाली  तरंगे उसी के अनुरूप अच्छी और प्यारी हों .
२. हर वक्त ,हर जगह ,हर एक आदमी के हाथ का बना खाना  खाने से बचना चाहिए .यह वैज्ञानिक ,आधुनिक दृष्टि कौण से भी उचित है .
३ .किसी रिश्तेदार के घर जाओ तो  उनके बच्चों को अपने प्यार का परिचय दो .तथा उनके लिए कुछ न कुछ जरुर ले कर जाओ .
४ .विशेष अवसर पर किसी को निमंत्रित करो तो उनके बच्चों को बुलाना मत भूलें .
५ .भोजन या जलपान के समय कोई  अतिथि ,विद्वान या परिचित आ जाये तो ,हो सके तो ,उनसे भी भोजन का आग्रह जरुर करें .
६ .जब कोई अतिथि हमारे यहाँ भोजन करें तो यही उचित है की हम अपने हाथ से उन्हें भोजन  परोसें और उनके भोजन कर लेने के बाद ही भोजन करें ,साथ भोजन करने की अवस्था में भोजन पहले उनके सामने रखना चाहिए ,
७ .किसी इसे स्थान में जाये जहां हमारा आदर सत्कार हो और हमारे साथ कोई मित्र या परिचित हो तो उसको भी यथा संभव अपने आदर सत्कार में सम्मिलित करना चाहिए .
८ .रोगी के पास उन्ही को ठहरना चाहिए ,जो उसकी सेवा करना चाहतें हों या उनका दिल बहला सकें ,यदि रोगी पसंद करे तो उसे अच्छी कहानियां ,धर्मग्रन्थ या अच्छे गीत सुनाने चाहियें .
९ .दूसरों की सेवा इस भाव से मत करो की उनसे कोई स्वार्थ सिद्ध होगा .सेवा अपना बड़प्पन प्रकट करते हुए ना करें अपितु विनीत भाव से करनी चाहिए .
१० .किसी को दान ,इनाम दूर से,घमंड से , घृणा से मत दो अपितु प्यार ,विनय और मुस्कुराते हुए देना चाहिए .

Tuesday, March 20, 2012

भविष्य देश का

<<<<<<<<<< ' भविष्य बचाओ '>>>>>>>>>
"भविष्य देश का भटक रहा है गली गली में भूखा प्यासा 
रोने की भी जान नहीं है नहीं आंखों में नीर ज़रा सा !
एक एक दाने को हम तरसें कैसे हो हमारा पोषण 
शिक्षा स्वास्थ्य की बातें खोखली कहीं खो गया अब तो बचपन !!
मन के सपने मन में रहते कोई पीड़ा समझ न पाता
हम भी गाते गीत वतन के चलते तान कर अपना माथा !
तन है सूखा मन है खाली क्या यही है सुन्दर जीवन
करो प्रभु उदर पूर्ती हमारी नहीं तो ले लो वापस जीवन " !!
(सत्य ....शर्मा )
 

Sunday, March 18, 2012

बांटों ,मत करो बर्बाद अन्न





>>>>>"देखो -सोचो -और बांटों ,मत करो बर्बाद अन्न "<<<<
"पल -पल ,तिल -तिल ख़त्म होता सा ,केवल अस्थि -पिंजर का यह बदन 
फटी नुची जिन्दगी की ज़िंदा लाश ही तो हूँ मैं, क्यूँ मुझे भेजा या रब इस जहान में 
जहाँ मयस्सर नहीं एक दाना भी उदराग्नि के लिए ,और कहीं अनाज की बर्बादी है 
फिर किस इन्तजार में चल रही हैं ये साँसें ,क्या अभी बाकी है कोई गीध मुझे नौचने को !!"
(सत्य....शर्मा)

बांटों अन्न - करो जीवन रक्षण

<<<<<<<<"बांटों अन्न - करो जीवन रक्षण">>>>>>>> 
"नाम की हूँ मैं एक अभागिन माँ 
जीर्ण बाहू और शीर्ण शरीर ,न स्तन में दुग्ध न नयन में नीर 
तृप्त करना दो दूर रहा ,ना बुझा सकी तेरी क्षुधा !
घास -फूस खा- खा कर चाहा करें तेरा पोषण ,मेरे स्तन
शुष्क तन और छुब्ध मन ,रक्त - मेद रहित यह नीरस बदन
ना कर सका तेरी रक्षा !!
माता नहीं कुमाता बनी तेरी जननी, जो जन्म दिया तुझे यूँ मरने को
ना देना जन्म इस धरा भाग में ,ओ जगत के पालनहार
जहां नीर नहीं जहां क्षीर नहीं ना दीखता अन्न का सिन्धु
नहीं दे सकती अश्रु विदाई भी ,त्रस्त नैनों में नहीं शेष कोई जल बिंदु !!!"
<<<<<<<"Share your grain- Save life ">>>>>>>
"I am an unfortunate mother
my body has no flesh,there is no milk in my breast nor water in eyes
I could not remove the hunger of my son
eating grass and hey ,I could not feed you
I could not save your life from hunger
I birth you to die,really i can't be a mother
O God never send any one on this earth
where there is no water ,no milk and no grain to eat
how i pray for him there is nothing ..."

" बचपन "





<<<<<<< " बचपन " >>>>>>>>
"बचपन की तलाश है
कहीं खो गया है बचपन गलियों में रो रहा है बचपन
होटलों में ढाबों में धो रहा है बरतन काँच की चूड़ियों में पिरो रहा है शबनम !
बीड़ियों में तंबाखू समो रहा है बचपन गोदियों में बचपन खिला रहा है बचपन
योजनाएँ सारी ध्वस्त है
कहीं भी खिलखिलाता नज़र नहीं आ रहा है बचपन "!!
<<<<<<< "Chidhood ">>>>>>>>>
"searching of chidhood
somewhere has missed the childhood,in the street it is crying
In hotels and in resturents it is washing pots,in factories it is working!
in danger places it is working,it is making play infents in its lap
all the plans are faild
nowhere is seen the childhood is laughing"!! (Kavita gour)
 

"बांटों अन्न - बचाओ जीवन "

<<<<<<<<<< "बांटों अन्न - बचाओ जीवन ">>>>>>>>>>
"बड़ी दावतें कहीं ,कहीं शराबों के छलकते जाम हैं 
कंही शबाब पर उड़ते नोटों के दर्शन आज आम हैं 
दुसरी तरफ भूख से बिलखते लोग ,रोटी के टुकड़े के लिए तड़पते
क्यों इतना फरक तेरी दुनिया में ऊपर वाले !
मयस्सर भी नहीं एक कौर जिनके जीवन में
क्या सुनाएँ उन्हें इस देश की गौरव गाथा ,
कया उठाएंगे ये गर्व से अपना माथा
शर्म उन्हें नहीं हमें आनी चाहिए
खुद को इन्सान कहलाने से पहले इनको अपना समझना चहिये
कुछ ओउर नहीं एक ग्रास ही सही नित अपने भोजन से देना चहिये !!"
(सत्य .... शर्मा )
 

< "भाग्य - प्रारब्ध - पुरुषार्थ ">

><><><><><!! "भाग्य - प्रारब्ध - पुरुषार्थ "><><><><><
हमेशा से एक बहस चली आयी है ,...भाग्यवादी मानते हैं की होता वही है जो मनुष्य के भाग्य में अंकित है अर्थात पूर्व निर्धारित है ,उनका विश्वास है के होता वही है जो इश्वर द्वारा मनुष्य के भाग्य में लिख दिया गया है !
प्रारब्ध वादियों का मानना है की मनुष्य जो भी भला ,बुरा करता है वही उसे जनम जन्मान्तर में मिलता है यह ईश्वरीय वयवस्था है !!
पुरषार्थ में विश्वास करने वाले उद्योगी जन सारा बल पुरषार्थ पर देते हैं . वे श्रम और उद्यम पर ही सारा बल लगातें हैं !!!
आपके सुस्पष्ट विचारों को आमंत्रण है ;- सुस्वागतम 

ईश -अभिलाषा

<<<<<<<<'God - wish '>>>>>>>>>>>>
"God wishes that all living things be full of bliss.
Wheather young or old , weak or strong , 
Living or departed or yet unborn " !!
<<<<<<<< ' ईश -अभिलाषा '>>>>>>>>>>>
"ईश्वरकी अभिलाषा यही है की प्रत्येक जीवनधारी आनंद से परिपूर्ण हो
चाहे वह युवा हो या वृद्ध , कमजोर हो या फिर शक्तिशाली ,
शाश्वत ही या नश्वर अथवा चाहे अजन्मा ही क्यों ना हो " !!
(Satya...sharma )