Wednesday, March 21, 2012

शारीरिक सौदर्य

पार्थिव सौन्दर्य जिसे हम शारीरिक सौदर्य भी कहते हैं वास्तव में नीच गति की और ले जाता है ,जिसके कारण हम सौन्दर्य और अपना दोनों को ही नष्ट कर लेते हैं .उद्धरण के लिए एक सुरभित  सुन्दर पुष्प हमें अपनी और आकृष्ट करता है ,तुरंत ही हमारे मन में उसे प्राप्त करने की अभिलाषा उत्पन्न होती है,हम निष्ठुरता से उसे डाल से तोड़ कर अपने नेत्रों और नासिका को क्षणिक आनंद प्रदान करतें हैं .थोड़ी देर के बाद वह पुष्प अपना सौंदर्य और सुरभि खो देता है ,तब हम उसको धुल में फेंक कर, पेरों से रोंदते हुए चल पडतें हैं .
 " भौतिक सौन्दर्य की यही परिणिति है "

उलझने

           *   वनस्पति शास्त्री यह नहीं बता पाते कि पहले बीज की उत्पत्ति हुई या फल की ?
         **   जीव विज्ञानी यह नहीं बता पाते कि पहले पक्षी हुआ या अंडा ?
       ***   व्यवहारी मानववेत्तायह नहीं जान पाए कि फल की प्राप्ति कर्म से होती है या देव से ?
      ****  भौतिक शास्त्री यह सिद्ध नहीं कर पाए कि प्रकाश किरण रूप में फैलता है या कण -कण मे ?
    *****  सागर विज्ञानी  यह बताने ने असमर्थ हैं कि समस्त नदियाँ अथाह जल राशी समुद्र में पहुंचा रही हैं फिर 
                भी समुद्र में बाढ़ क्यों नहीं आ रही ?
  ******  शरीर विज्ञानी यह नहीं बता पाते कि शारीर में आत्मा कहाँ स्थित है ?
*******   रोग परीक्षा चिकित्सक जहाँ एक तरफ थूक को अत्यंत गन्दा एवं रोग प्रसारक बतातें हैं किन्तु  वही 
               चिकित्सक अपनी प्रेमिका अथवा प्रेमी के अधरों व्  जीभ को रसपान करता है . क्यों ?

<<<<<< "नाम बड़े और दर्शन छौटे ">>>>>>>>>>

गीध दुनिया का सबसे विचित्र पक्षियों में से एक है ,उसकी नेत्र ज्योती बहुत ही तेज होती है और पंखों में अद्भुत शक्ति होती है .! भारतीय साहित्य में "आँखें ज्ञान का प्रतीक मानी गयी हैं और पंख कर्म का"       जिनकी आँखे तेज होती हैं उनको बुद्धिमान और जिनके पंख तेज होतें हैं उनको पुरषार्थ एवं परिश्रमी  कहतें हैं.
विद्वानों का कथन है की "जो व्यक्ति अपने पुरुषार्थ के बल पर उच्च स्थान को पाकर भी तुच्छ कार्यों पर अपनी नजर गडाए रहतें हैं वे गीध ही हैं " 'क्योँ की गीध अपने पंखों के बल पर उचाईयों पर पहुँच कर भी भूमि पर पड़े सड़े मांस पर दृष्टी रखता है .अतः इसी उड़ान किसी का हित नहीं कर सकती !

भारतीय सिनेमा

प्रदर्शित होने वाली पहली भारतीय फिल्म थी "आलम आरा " इसका निर्माण 'इम्पिरिअल मुवीटोन' फिल्म कंपनी ने किया था .निर्देशन  निर्माता 'आर्देशिर इरानी 'ने स्वयं किया था . इस फिल्म के मुख्य कलाकार थे  -
मास्टर विट्ठल ,जुबेदा ,जिल्लो ,जगदीश सेठी ,और श्री पृथ्वीराज कपूर ने इस फिल्म में खलनायक की भूमिका निभाई थी .
इससे भी पहले मामा वारेरकर लिखित "तुकाराम ' फिल्म बनी थी किन्तु इस फिल्म के नेगेटिव पिघलकर खराब हो गए थे .
(सत्य....शर्मा )

Tuesday, March 20, 2012

भारतीय सिनेमा

सर्व प्रथम  7  जुलाई 1896  को वाटसन होटल मुंबई  में एक रुपया के प्रवेश शुल्क  पर लुमियर ब्रदर्स  फिल्म का प्रदर्शन हुआ था जिसे शहर के प्रतिष्ठित  व्यक्तियों ने देखा ,
इस फिल्म के प्रदर्शन पर जब बहुत भीड़ उमड़ने लगी  तो नावल्टी  में चार आने शुल्क पर प्रदर्शन प्रारंभ हुआ 
तभी से चवन्नी क्लास दर्शक  वर्ग बना ,प्रारंभ  में इंग्लिश फिल्मे ही दीखाई जाती थी .
1913  में पहली हिंदी फिल्म राजा हरिश्चंद्र श्री घुंडी राज गोविन्द ( दादा साहेब फाल्के ) ने बनाई  थी .
1914  में दूसरी हिंदी फिल्म " भस्मासुर मोहिनी " बनी जो असफल रही .
 1917  में "सत्यवान सावित्री " बनाई जो सफल रही .
कुछ लोग पुंडलिक  को पहली कथा फिल्म मानते हैं जो महाराष्ट्र के प्रसिद्ध संत थे के जीवन  पर आधारित थी  इस फिल्म को आर सी  तोरने एवं एन ए चित्रे ने बनाया था . यह फिल्म 18  मई 1912  को प्रदर्शित हुई .

भविष्य देश का

<<<<<<<<<< ' भविष्य बचाओ '>>>>>>>>>
"भविष्य देश का भटक रहा है गली गली में भूखा प्यासा 
रोने की भी जान नहीं है नहीं आंखों में नीर ज़रा सा !
एक एक दाने को हम तरसें कैसे हो हमारा पोषण 
शिक्षा स्वास्थ्य की बातें खोखली कहीं खो गया अब तो बचपन !!
मन के सपने मन में रहते कोई पीड़ा समझ न पाता
हम भी गाते गीत वतन के चलते तान कर अपना माथा !
तन है सूखा मन है खाली क्या यही है सुन्दर जीवन
करो प्रभु उदर पूर्ती हमारी नहीं तो ले लो वापस जीवन " !!
(सत्य ....शर्मा )
 

Monday, March 19, 2012

<"सच्ची सुन्दरता ">

<<<<<<<<<<"सच्ची सुन्दरता ">>>>>>>>>>>
सच्ची सुन्दरता वह है जिसके संपर्क से दूसरों में भी सुन्दरता आ जाए !
स्वयं की सुन्दरता केवल एक व्यक्ति तक ही सिमित है ,
जिसके सम्पर्क में आकर असुन्दर भी सुन्दर हो जाये  
वही सच्ची सुन्दरता है !!
<<<<<<<<<<"True Beauty">>>>>>>>>  'so
Tru beauty is that whose compeny makes other beautiful !
Self beauty is omly up to oneself ,
Whose compney changes ugly into beautiful
Is called 'The True Beauty'!!
(satya ...sharma)